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लेखनी कहानी -22-Dec-2022



श्वेत वसना रजनि जगमगाने लगी.
ऊंघती  बसुमती  को  जगाने लगी.

आज पूनम कुमारी,बनी नव दुल्हन,
सच  हुए  भोर के सब सुहाने सपन.
रैन   की  मांग  सिंदूर  में  सज  गई,
सज गए  कुंतलों में सुमन ही सुमन.

कोई कुसुमित लता सी सहज सुंदरी,
मौन  कामुक  हृदय को मनाने लगी....

व्योम  में  बिछ  रहे हैं रतन ही रतन,
तारकों  तारिकाओं से  पूरित  गगन.
नृत्य करतीं प्रकृति  प्रीति पर्यांकिनी,
पिंगला पंकिनी सी थिरकती  किरन.

शुचि समीरण सुवासित सुरभि बांटती,
सोम, सौरभ  में  संस्रति  नहाने  लगी...

प्रिय प्रतीक्षण की बेला मुखर हो चली,
प्रेयसी प्रीति प्रियतम को  मिलने चली.
है परीक्षण की पारी का अवसर सुघड़,
मधुरती   मंजु    मोती    पिरोने   चली. 

रूपसी    उरबसी    साधना   संगिनी ,
साध्य  आराध्य  को  है  सजाने  लगी...

जग चले  सृष्टि के अर्ध निद्रित नयन,
बांह में बांह  थामे  हैं मधुरिम  मिलन.
स्वप्न तंद्रिल नयन खोल अलका चली,
बह  चले  वारि समवात  में  हैं  बयन.

मोक्षदा  प्राण  दा  विधु  बधूटी  विभा,
मालती    मंजरी     मुस्कराने    लगी....
-अभिलाषा देशपांडे

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3 Comments

बहुत बहुत सुन्दर भाव-प्रसून खिलखिला उठा।

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Sachin dev

22-Dec-2022 06:12 PM

Amazing

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VIJAY POKHARNA "यस"

22-Dec-2022 03:24 PM

Awsysome

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